अल्पसंख्यक कल्याण पर राजगीर में राष्ट्रीय ‘चिंतन शिविर’ शुरू
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर, बिहार में किया जा रहा है। यह कार्यक्रम अल्पसंख्यक कल्याण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए नीति-आधारित रोडमैप तैयार करने पर केंद्रित है। इसमें केंद्र और राज्यों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
राज्यों के मंत्रियों की भागीदारी
चिंतन शिविर में अरुणाचल प्रदेश से मंत्री एडवोकेट केंटो जिनी, नागालैंड से मंत्री (सलाहकार एवं विधायक) इमकोंगमार, सिक्किम से सामाजिक कल्याण विभाग के मंत्री समदुप लेप्चा, त्रिपुरा सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री शुक्ल चरण नोआतिया और बिहार से अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद ज़मा खान सहित कई राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री शामिल हो रहे हैं। मंत्रालय और विभिन्न राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों की भी सक्रिय भागीदारी रहेगी।

पांच प्रमुख विषयों पर मंथन
चिंतन शिविर में अवसंरचना विकास (प्रधान मंत्री जन विकास कार्यक्रम – पीएमजेवीके), सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण (पीएम विकास और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम), वक्फ प्रबंधन और हज प्रबंधन सहित पांच प्रमुख विषयों पर सामूहिक चर्चा होगी। संवादपूर्ण सत्रों के माध्यम से कार्यान्वयन में अंतराल, सर्वोत्तम पद्धतियों और कार्रवाई योग्य अनुशंसाओं की पहचान की जाएगी।
डिजिटल पहलों का शुभारंभ
19 फरवरी के उद्घाटन सत्र में तीन प्रमुख डिजिटल पहलों का शुभारंभ किया जाएगा। इनमें पीएमजेवीके मोबाइल एप्लिकेशन, हज सुविधा स्मार्ट रिस्ट बैंड और नागरिक सेवाओं के लिए एआई-संचालित चैटबॉट शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, सेवा वितरण को सुगम बनाना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
कार्यक्रम की संरचना
पहले दिन (18 फरवरी 2026) परिचय सत्र, वरिष्ठ अधिकारियों की विषयगत प्रस्तुतियां तथा इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया, फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (आईआईटी दिल्ली) और सर्वे ऑफ़ इंडिया की विशेष प्रस्तुतियां आयोजित होंगी। दिन का समापन बिहार की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले कार्यक्रम के साथ होगा।
दूसरे दिन (19 फरवरी 2026) योग सत्र से शुरुआत होगी, जिसके बाद उद्घाटन समारोह और विषयगत चर्चाएँ होंगी। कार्यक्रम नीति दिशा और कार्यक्रम सुधार के लिए ठोस सिफारिशें तैयार करने पर केंद्रित रहेगा।

स्थल का ऐतिहासिक महत्व
राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय, जो यूनेस्को विश्व धरोहर सूची से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल है, प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और समावेशी संवाद का प्रतीक माना जाता है। यह ऐतिहासिक परिवेश अल्पसंख्यक कल्याण और राष्ट्रीय विकास पर विचार-विमर्श के लिए प्रेरक पृष्ठभूमि प्रदान करता है।
समावेशी विकास की दिशा में पहल
इस चिंतन शिविर से अपेक्षा है कि यह कार्यक्रम कार्यान्वयन सुधार के लिए ठोस कार्रवाई बिंदु, नवाचारी समाधान, बेहतर अंतर-सरकारी समन्वय और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करेगा।
