भूत, वर्तमान और भविष्य के बीच उलझा इंसान, “मनु की रविवारीय” में पढ़िए- जीना है तो आज को जी भरकर जिएं
भूत वर्तमान और भविष्य “ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता अगर और जीते रहते, तो यही इंतिज़ार होता”
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Read Moreकक्षा में मोबाइल अपराध, पर विभाग के आदेश व्हाट्सऐप पर! – डॉ. सत्यवान सौरभ विद्यालयों में अध्यापकों के मोबाइल फ़ोन
Read Moreइंसानियत कौन कहता है दुनिया से इंसानियत ख़त्म हो गई है । जहाँ एक ओर बड़ी बेरहमी से रिश्तों का
Read Moreमां केवल एक शब्द नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, धैर्य और ममता का सबसे सुंदर रूप है। संसार में यदि किसी
Read Moreमेरी स्विट्जरलैंड यात्रा की वो रात चलिए आज हम आपको एक छोटी सी घटना जो मेरे साथ जर्मनी से स्विट्जरलैंड
Read Moreविवाह में सियासत बंद करो, साझेदारी का समय आ गया – डॉ. प्रियंका सौरभ शादी कोई सत्ता-संघर्ष नहीं, बल्कि दो
Read More– डॉ. प्रियंका सौरभ आज के समय में पीएचडी (Doctor of Philosophy) को लेकर समाज में अनेक धारणाएँ प्रचलित हैं।
Read More(1 मई ,अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष) अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस केवल
Read Moreडॉ. सत्यवान सौरभ भारत में आरक्षण पर बहस कोई नई नहीं है, लेकिन समय-समय पर यह मुद्दा नई परिस्थितियों और
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