सम्पादकीय

सम्पादकीय

आँगनवाड़ी प्रणाली का बदलता स्वरूप और भारत का भविष्य

डॉ. प्रियंका सौरभ किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके प्राकृतिक संसाधनों या भौतिक संपदा में नहीं, बल्कि उसकी मानव

Read More
सम्पादकीय

‘गुंडा’ से गुंडागर्दी तक, “मनु की रविवारीय” में पढ़िए- ननहकू सिंह के बहाने बदलते समाज और शब्दों के मायने

वो एक गुंडा ही तो था , जिसने गुंडा शब्द को इज़्ज़त दिलाई । गुंडा एक किरदार बन पाया ।

Read More
सम्पादकीय

कोकरोच पार्टी, टूलकिट और जेन-जी को भड़काने का षड्यंत्र — परदे के पीछे कौन?

डॉ. प्रियंका सौरभ आज का युग सूचना और संचार का युग है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और   डिजिटल प्लेटफॉर्म ने

Read More
सम्पादकीय

कब तक सरपंचों, पार्षदों के हक का उपयोग करते रहेंगे पति?

 डॉ. प्रियंका सौरभ भारत में लोकतंत्र की जड़ें केवल संसद, विधानसभा और बड़े राजनीतिक मंचों में नहीं, बल्कि गांवों, कस्बों

Read More
सम्पादकीय

दिग्गज गेंदबाज़ों पर भारी पड़ा किशोर बल्लेबाज़, “मनु की रविवारीय में पढ़िए”- वैभव सूर्यवंशी में दिखती है भारतीय क्रिकेट की सुनहरी सुबह

वैभव सूर्यवंशी वैभव सूर्यवंशी, भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ एक नया सितारा । जिस उम्र में बच्चे यह तय नहीं

Read More
सम्पादकीय

विकास की अंधी दौड़ में लहूलुहान पर्यावरण, क्षत-विक्षत धरती

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष पर्यावरण ही स्थायी अर्थव्यवस्था है। सुंदरलाल बहुगुणा भारतीय पर्यावरण आंदोलन के महान पुरोधा सुंदरलाल बहुगुणा

Read More