सम्पादकीय

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सुर्ख़ियों से ग़ज़लों तक का सफ़र- जब एक पत्रकार ने लफ़्ज़ों को एहसासों का हमनशीं बना दिया

पत्रकारिता का संसार तथ्यों, तात्कालिकता और सामाजिक सरोकारों से संचालित होता है, जबकि साहित्य संवेदनाओं, अनुभवों और आत्मिक अभिव्यक्ति का

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चमकते बाज़ार से अस्पताल की चौखट तक, “मनु की रविवारीय में आज पढ़िए”- महानगर का सबसे कड़वा सच

किसी काम से दिल्ली आना हुआ। काम क्या था—एक पारिवारिक समारोह में शामिल होना था। नौकरीपेशा लोगों के लिए कार्यालयी

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रेलवे स्टेशनों के बुक स्टॉलों पर पसरा सन्नाटा: क्या इंटरनेट युग ने छीन ली पढ़ने की संस्कृति

– डॉ. सत्यवान सौरभ भारतीय रेलवे स्टेशन केवल यात्रियों के आवागमन के केंद्र नहीं रहे हैं, बल्कि वे   लंबे

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उजाले अपनी यादों को साथ रहने दो, “मनु की रविवारीय” मे पढ़िए- ज़िंदगी के अंतिम पड़ाव की संवेदनशील दास्तान

अपना और अपने बच्चों का जन्मदिन, पत्नी के साथ शादी और शादी की सालगिरह के सुनहरे पलों को जीते हुए

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पद से नहीं, व्यक्तित्व से बनती है पहचान, “मनु की रविवारीय में पढ़िए”- रिटायरमेंट के बाद शुरू होती है असली परीक्षा

रिटायरमेंट अभी कुछ दिन पहले की ही बात है। हमारे एक मित्र का रिटायरमेंट था। मित्र के बनिस्बत सहयोगी कहना

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पटना से कुशीनगर तक, “मनु की रविवारीय में पढ़िए- एक सफ़र, जिसने इतिहास, अध्यात्म और शांति से कराया साक्षात्कार

यह पता चलते ही कि आने वाले सप्ताह में तीन लगातार छुट्टियाँ आने वाली हैं, मन मचलने लगा । बेताब

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लखनऊ कोचिंग अग्निकांड: क्या हमारे बच्चों की सुरक्षा सिर्फ खबर बनकर रह जाएगी?

– डॉ. सत्यवान सौरभ लखनऊ में हुए हालिया कोचिंग अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। धुएँ

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