सम्पादकीय

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एक देश, एक पाठ्यक्रम: संघीयता का संकट या शिक्षा क्रांति?

डॉ. सत्यवान सौरभ “रुकने वालों का इतिहास नहीं होता। एक देश–एक पाठ्यक्रम… शिक्षा के नाम पर लूट का विरोध जारी

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ज़िंदा रहते खुद की तेरहवीं, “मनु की रविवारीय” में पढ़िए- एक बुज़ुर्ग की पीड़ा ने समाज को दिखाया आईना

घर… जहाँ इंसान अपने आप को सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करता है। जहाँ से उसे पुरज़ोर सम्मान और भरोसे की

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र में 4 आत्महत्याएँ

डॉ. सत्यवान सौरभ (आखिर क्यों टूट रहे हैं छात्र?) भारतीय तकनीकी शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थान, जिन्हें कभी “सपनों की फैक्ट्री”

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जिंदगी का सच, “मनु की रविवारीय” में आज पढ़िए- परदे के पीछे रहकर भी पूरी व्यवस्था संभालते हैं ‘स्टेपनी’ जैसे लोग

स्टेपनी समय का पहिया भी अजीब है। इतनी तेजी से घूमता है कि उसकी गति का अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो

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संसद में महिला आरक्षण: संवैधानिक जरूरत या राजनीतिक रणनीति?

 डॉ. प्रियंका सौरभ संसद में महिला आरक्षण का प्रश्न भारतीय लोकतंत्र के विकास और उसकी समावेशी प्रकृति से गहराई से

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समाजवाद की बात, व्यवहार में भेदभाव, “मनु की रविवारीय” में पढ़िए- ‘हाउस हेल्प’ और ‘रेजिडेंट’ के बीच खड़ी अदृश्य दीवार

बराबरी ग्राउंड फ्लोर पर ही रह गई अपार्टमेंट में अमुमन दो लिफ्ट हुआ करता है । अगर अपार्टमेंट थोड़ा ज़्यादा

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