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बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में विभिन्न गतिविधियों की समीक्षा, मंत्री ने वैज्ञानिकों को बताया “बिहार का भाग्य निर्माता

12 मई 2026, पटना। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम ने मंगलवार को बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय का दौरा कर वहां संचालित शिक्षण, शोध एवं प्रसार गतिविधियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं पदाधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य में पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने पर विस्तृत चर्चा की।

कुलपति ने दी विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी

विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने पौधा भेंट कर मंत्री का स्वागत किया। कुलपति ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, पशु स्वास्थ्य जांच शिविरों, टीकाकरण अभियानों, आधुनिक शोध कार्यों तथा पशुपालकों के लिए संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उत्पादों, जैसे बटेर लिट्टी, चिकेन लिट्टी एवं व्हे सूप आदि के बारे में भी अवगत कराया।

वैज्ञानिकों को बताया “बिहार का भाग्य निर्माता

बैठक के दौरान नंदकिशोर राम ने कहा कि बिहार का गौरवशाली इतिहास रहा है और राज्य को पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए सभी को समन्वित प्रयास करने होंगे। उन्होंने वैज्ञानिकों को “बिहार का भाग्य निर्माता” बताते हुए कहा कि उनके शोध एवं नवाचार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पशुपालकों की आय बढ़ाने पर जोर

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पशुपालकों की आय बढ़ाने एवं रोजगार सृजन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने गौवंश के साथ भैंस पालन को बढ़ावा देने, मुर्रा नस्ल के संवर्धन तथा रोजगारपरक योजनाओं के निर्माण पर विशेष बल दिया। साथ ही राज्य में दो नए पशु विज्ञान महाविद्यालय खोलने की दिशा में पहल किए जाने की बात कही।

देशी नस्लों के संरक्षण कार्यों की सराहना

नंदकिशोर राम ने विश्वविद्यालय के पशु प्रक्षेत्र परिसर का निरीक्षण किया तथा देशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य में पशुपालन क्षेत्र के विकास को और गति देने के लिए सरकार एवं विश्वविद्यालय मिलकर कार्य करेंगे, ताकि इसका सीधा लाभ पशुपालकों तक पहुंच सके।

वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक रहे उपस्थित

इस अवसर पर विभाग एवं विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

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