भूत, वर्तमान और भविष्य के बीच उलझा इंसान, “मनु की रविवारीय” में पढ़िए- जीना है तो आज को जी भरकर जिएं
भूत वर्तमान और भविष्य
“ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता अगर और जीते रहते, तो यही इंतिज़ार होता”
मिर्ज़ा ग़ालिब
ज़िंदगी कम होती जा रही है और उम्र बढ़ती जा रही । हमें पता कहाँ चल पाता है । ऐसा लगता है,हम सब कुछ जानते हुए भी अनजाने सा व्यवहार कर रहे हैं । ज़िंदगी कहाँ सब्र करती है । कहाँ

स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक
अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा
मौका देती है वो आपको । वो तो बस अपनी ही मौज में रहती है । एक पल का इंतज़ार भी उसे बरदाश्त नहीं , बस हम ही हैं जो उसे धता बताने की असफल कोशिशें करते रहते हैं । तरह-तरह की योजनाएं हमारे सामने आती रहती हैं । तमाम तरह के पासवर्ड इस्तेमाल करते हैं । भविष्य के बारे में हर वक्त ज़ेहन में कुछ न कुछ चलता ही रहता है । वर्तमान बिचारा यूँ ही गुज़रता हुआ अपने आप को देखता रहता है जैसे वो एक उपेक्षित मुसाफ़िर हो । बस बिना आगा पीछा सोचे रास्ते पर बढ़ता ही जा रहा होता है ।हमें फुर्सत ही कहाँ है वर्तमान में रहने की । हम जानते हैं और बखूबी समझते हैं कि बीता हुआ वक़्त वापस नहीं आने वाला और ना ही हम भविष्य के बारे में सुरक्षित सोच सकते हैं, पर एक वर्तमान ही है जिसे हम बेइंतहा मोहब्बत करते हुए जी सकते हैं ।
कहा भी गया है वर्तमान से बेहतर कोई वक़्त नहीं । जी भर कर जी लें । कल को किसी ने नहीं देखा है । हर पल को आख़िरी पल मान कर पुरी शिद्दत के साथ ज़िंदगी का लुत्फ उठाएँ ।
अब चलिए हम आगे आपको बताते हैं कि पल भर में ही कैसे आपके सारे समीकरण बदल जाते हैं । आप अचानक से सारे किंतु परंतु, अपनी सारी योजनाओं को ताक पर रख देते हैं । आपके सारे पासवर्ड की चिंता अचानक से ही ठप्प पड़ जाती है ।
एक छोटी सी घटना जब आपकी ज़िंदगी में इतनी उथल पुथल मचा सकती है तो फिर भविष्य को लेकर इतना हाय तौबा क्यों ।
कुछ दिन पहले की बात है । वार्षिक स्वास्थ्य जांच चल रही थी । इ. सी. जी. भी होना था। उसे कराए जाने से कुछ पल पहले मन में एक बात कौंधती है – अगर यह ग्राफ़ कुछ अपनी मर्ज़ी दिखा गया तो ? इतना ही ख़याल काफ़ी था मुझे परेशान करने के लिए ।
खैर ! भगवान भगवान करते हुए इ. सी. जी. संपन्न हुआ । मुसीबत में ही तो भगवान बड़े शिद्दत से याद आते हैं । डॉ के पूछने पर उन्होंने बताया कि सब कुछ ठीक ठाक है । कुछ समय के लिए जान में जान आई । सारे टेस्ट्स हो जाने के बाद हम विशेषज्ञ डॉक्टर के पास टेस्ट्स के परिणाम के साथ पहुंचते हैं । उन्होंने इ. सी.जी. देखने के बाद कहा कि वैसे तो सब कुछ ठीक ही लग रहा है, पर अगर घर में किसी को हृदय रोग की समस्या रही हो तो किसी हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह ले लेनी चाहिये , क्योंकि रिपोर्ट में – Right Bundle Block दिखा रहा है अब उनका यह कहना और मुझे ऐसा लगा कि मैं वाक़ई हृदय रोगी हो गया हूँ । हार्ट अटैक के सारे लक्षण जिसे मैने व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ार्म के माध्यम से जाना था वो सारे लक्षण परिलक्षित होने लगे । अब अचानक से मैं बीमार हो गया। मेरे दिल की धड़कन अचानक से अनियंत्रित होने लगी। हृदय के बायीं ओर भी मुझे ऐसा महसूस हुआ कि हल्का सा दर्द हो रहा है । वाक़ई मेरी हालत देखने लायक थी । कितने सारे निर्णय मैने उसी एक क्षण में ले डाले । एक दो और डॉक्टरों को मैंने वो रिपोर्ट दिखायी । सभी ने बताया चिंता की बात नहीं है । आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का भी सहारा लिया । गुगल बाबा से भी सलाह माँगी । आजकल तो हम सभी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया के दौर में अपने आप को ज्ञानी समझने लगे हैं । डॉक्टर की वर्षों की मेहनत , अपने विषय पर उनकी पकड़ और हम चाहते हैं कि बस उँगलियों के इशारे पर सब कुछ हमारे सामने हो ।
वैसे इतना सब कुछ करने के कहीं भी मुझे चिंता की कोई बात नज़र नहीं आई । अचानक से मुझे मेरे पिछले वार्षिक स्वास्थ परीक्षण की इ.सी.जी. रिपोर्ट मिली । मेरे दिल को तसल्ली हुई जब मैंने देखा कि पिछले साल भी उस रिपोर्ट में- Right Bundle Block बताया गया है । जान में जान आई। हालाँकि वो भूत पुरी तरह से ग़ायब नहीं हुआ है । यदा कदा प्रकट हो ही जाता है। पर एक बात तो है इस घटना ने मुझे मेरे ज़िंदगी के दृष्टिकोण को बदलने में मदद की। अब मैं भविष्य की चिंता के बग़ैर वर्तमान में जीने की कोशिश कर रहा हूँ।
अब कोशिश यही रहती है कि आने वाले कल की अनिश्चितताओं में उलझने के बजाय आज को जिया जाए—पूरी सजगता, पूरी कृतज्ञता और पूरी मोहब्बत के साथ। भविष्य का बेहतर होना भूतकाल के अनुभवों और वर्तमान की चुनौतियों के साथ मिलकर खड़े होने पर ही निर्भर करता है।
मनीष वर्मा “मनु”
