‘वंदे मातरम्’ को अर्थ सहित किया गया प्रकाशित, राष्ट्रगान और बिहार गीत भी शामिल
पटना। शिक्षा विभाग की ओर से अधिवेशन भवन में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला-सह-चिंतन शिविर का मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी एवं शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी ने संयुक्त रूप से लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव द्वारा संपादित ‘वंदे मातरम्’ बुकलेट तथा शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी द्वारा लिखित ‘वंदे मातरम्’ पुस्तक का लोकार्पण किया।
मुरली मनोहर श्रीवास्तव द्वारा संपादित ‘वंदे मातरम्’ बुकलेट को विशेष रूप से इस उद्देश्य से तैयार किया गया है कि लोग राष्ट्रगीत के भाव और अर्थ को आसानी से समझ सकें और दूसरों को भी समझा सकें। बुकलेट में ‘वंदे मातरम्’ के मूल पाठ के साथ उसका विस्तृत अर्थ भी प्रकाशित किया गया है।
बुकलेट की खासियत यह है कि इसमें ‘वंदे मातरम्’ के अलावा राष्ट्रगान और बिहार गीत को भी शामिल किया गया है। इस तरह एक ही प्रकाशन में राष्ट्रीय गौरव के साथ बिहार की सांस्कृतिक पहचान को भी स्थान दिया गया है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवा पीढ़ी को देश की संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। ‘वंदे मातरम्’ को अर्थ सहित प्रकाशित करने की पहल को नई पीढ़ी तक राष्ट्रभावना और राष्ट्रीय विरासत को सहज रूप से पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित इस चिंतन शिविर में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने, युवाओं से संवाद स्थापित करने तथा विद्यार्थि‘वंदे मातरम्’ को अर्थ सहित किया गया प्रकाशित, राष्ट्रगान और बिहार गीत भी शामिल
पटना। शिक्षा विभाग की ओर से अधिवेशन भवन में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला-सह-चिंतन शिविर का मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी एवं शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी ने संयुक्त रूप से लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव द्वारा संपादित ‘वंदे मातरम्’ बुकलेट तथा शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी द्वारा लिखित ‘वंदे मातरम्’ पुस्तक का लोकार्पण किया।
मुरली मनोहर श्रीवास्तव द्वारा संपादित ‘वंदे मातरम्’ बुकलेट को विशेष रूप से इस उद्देश्य से तैयार किया गया है कि लोग राष्ट्रगीत के भाव और अर्थ को आसानी से समझ सकें और दूसरों को भी समझा सकें। बुकलेट में ‘वंदे मातरम्’ के मूल पाठ के साथ उसका विस्तृत अर्थ भी प्रकाशित किया गया है।
बुकलेट की खासियत यह है कि इसमें ‘वंदे मातरम्’ के अलावा राष्ट्रगान और बिहार गीत को भी शामिल किया गया है। इस तरह एक ही प्रकाशन में राष्ट्रीय गौरव के साथ बिहार की सांस्कृतिक पहचान को भी स्थान दिया गया है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवा पीढ़ी को देश की संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। ‘वंदे मातरम्’ को अर्थ सहित प्रकाशित करने की पहल को नई पीढ़ी तक राष्ट्रभावना और राष्ट्रीय विरासत को सहज रूप से पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित इस चिंतन शिविर में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने, युवाओं से संवाद स्थापित करने तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लेकर विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।यों के सर्वांगीण विकास को लेकर विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
