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पॉश समागम 2026: सुरक्षित कार्यस्थलों के निर्माण के लिए जवाबदेही और सामूहिक प्रतिबद्धता पर जोर

नई दिल्ली, पिंक एंड ब्लू – सिम्बायोटिक लिविंग,पंजीकृत गैर-सरकारी संगठन चैंबर ऑफ प्रोफेशनल की एक पहल, द्वारा 7वें वार्षिक राष्ट्रीय पॉश सम्मेलन ‘पॉश समागम 2026’ का सफल आयोजन नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में किया गया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से 200 से अधिक पेशेवरों ने भाग लिया, जिनमें अधिवक्ता, कंपनी सचिव, चार्टर्ड अकाउंटेंट और मानव संसाधन विशेषज्ञ शामिल थे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अतुल गर्ग, सांसद, गाजियाबाद उपस्थित रहे। इसके साथ ही डॉ. ओम प्रकाश व्यास, अध्यक्ष, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग, तथा लता गुप्ता, अध्यक्ष, दिल्ली महिला आयोग ने भी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
अतुल गर्ग ने महिला सुरक्षा के लिए पिंक एंड ब्लू के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर इतने सारे प्रबुद्ध पेशेवरों को एक मंच पर एकजुट देखना अपने आप में एक अनूठा अनुभव है। उन्होंने महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए सामूहिक प्रयासों के महत्व पर बल दिया तथा महिला-नेतृत्व वाले विकास और नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी राष्ट्रीय पहलों के व्यापक उद्देश्य से इसे जोड़ा।
डॉ. व्यास ने सुरक्षित वातावरण के निर्माण में मजबूत संस्थानों, जागरूकता और सामूहिक जवाबदेही की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, मानवाधिकारों और आपराधिक कानून के बीच संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने इस विषय पर रोकथाम से लेकर शिकायतों के प्रभावी समाधान तक एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई।

लता गुप्ता ने कहा कि महिलाएँ पहले से ही सशक्त हैं; आवश्यकता ऐसे सामाजिक वातावरण के निर्माण की है, जहाँ वे बिना किसी भय के अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकें और अपनी क्षमताओं को साकार कर सकें। उन्होंने पिंक एंड ब्लू के प्रयासों की सराहना की और महिला सुरक्षा एवं सशक्तीकरण को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा संगठन के साथ संभावित सहयोग के अवसर तलाशने की बात कही।
रीतू मेहरा, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, दिल्ली, ने विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप के महत्व पर जोर दिया। वहीं, प्रेरक वक्ता सुनील केसवानी ने प्रतिभागियों को मौन रहने के बजाय साहस के साथ आवाज उठाने और सकारात्मक बदलाव के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
रितु गोयल, अध्यक्षा, पिंक एंड ब्लू, ने “खुशहाल और स्वस्थ कार्यस्थलों का निर्माण” करने के संगठन के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त मानने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि उन्हें कार्यस्थल पर सुरक्षा, गरिमा और समान अवसर प्राप्त हों। उन्होंने बताया कि पिंक एंड ब्लू की विभिन्न पहलों से हजारों महिलाएँ लाभान्वित हुई हैं और संगठन सम्मानजनक एवं सुरक्षित कार्यसंस्कृति को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
सीएस नेसार अहमद, संरक्षक, पिंक एंड ब्लू, ने जोर दिया कि पॉश अनुपालन केवल नीतियाँ बनाने और दस्तावेज़ तैयार करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे नैतिक कॉरपोरेट गवर्नेंस और संगठनात्मक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है।
सुश्री संपदा लूंबा, अध्यक्ष – गाजियाबाद, पिंक एंड ब्लू, ने महिला सुरक्षा के क्षेत्र में संगठन के निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला और उत्तर प्रदेश में इसकी पहलों का विस्तार करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
नितिन गोयल, कोषाध्यक्ष, पिंक एंड ब्लू, ने संगठन के मूल मंत्र “सीखें, सेवा करें और सशक्त बनाएँ” को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि संगठन के पुरस्कार उन व्यक्तियों और पेशेवरों के योगदान को सम्मानित करते हैं, जो इन मूल्यों को अपने कार्यों में अपनाते हैं। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में लवली कुमारी,  सुनीता रंजन, निधि चौधरी, पवन दुबे, कविता श्रीवास्तव, आरती जैन तथा पिंक एंड ब्लू के सभी सदस्यों के योगदान की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान शगुन और उनकी टीम के समन्वय में प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक ने प्रभावशाली ढंग से संदेश दिया कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए जागरूकता, संवेदनशीलता और सामूहिक कार्रवाई अनिवार्य है।
कार्यक्रम का समापन ललित बब्बर, राष्ट्रीय संयोजक, पिंक एंड ब्लू, द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने संगठन की भविष्य की महत्वाकांक्षा साझा करते हुए सदस्यता को 5,000 तक पहुँचाने और देश के हर कोने में पिंक एंड ब्लू की पहुँच स्थापित करने का संकल्प व्यक्त किया।

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