सम्पादकीय

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रविवारीय में पढ़िए “कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता”

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता! कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता!! निदा फ़ाज़ली चलिए शुरुआत करते हैं

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जिंदगी हर वक्त नया मोड़ लेती है, “रविवारीय” में आज पढ़िए हार और जीत वक्त की होती है व्यक्ति की नहीं

जिंदगी हर वक्त एक नया मोड़ ले लेती है। आप सिर्फ और सिर्फ भौतिक चीज़ों में उलझकर रह जाते हैं,

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टैक्स देकर भी घंटों टोल पर इंतज़ार करते वाहन, समय और पैसों का होता नुकसान

आज भारत की टोल प्रणाली के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियाँ भीड़भाड़ और विलम्ब हैं। फास्टैग सिस्टम शुरू होने के

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चुनावों में डिजिटल अभियान, झूठे-सच्चे वादों का ऐलान

आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म अक्सर बड़े बजट वाले दलों के विज्ञापनों को अधिक दृश्यता देकर उनका पक्ष लेते हैं, अभियान को

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में- “भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली पर औद्योगीकरण का प्रभाव और लाभ”

यह लेख एनईपी 2020 के ढांचे के भीतर भारतीय उच्च शिक्षा पर औद्योगीकरण के प्रभावों और लाभों पर विमर्श करने

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श्राद्धकर्म : पितृऋण चुकाने का सहज एवं सरल मार्ग

हिंदू धर्म में उल्लेखित ईश्वरप्राप्ति के मूलभूत सिद्धांतोंमेंसे एक सिद्धांत ‘देवऋण, ऋषिऋण, पितृऋण एवं समाजऋण, इन चार ऋणों को चुकाना

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रविवारीय- फिर से याद कराने की कोशिश, “देखो भाईयों वो गुज़रा हुआ ज़माना, फ़िर से लौट कर है आया”

गुज़रा हुआ ज़माना! आता नहीं दोबारा!! हाफ़िज़ ख़ुदा तुम्हारा!!! पचास के दशक में आई मधुबाला और प्रदीप कुमार अभिनीत फ़िल्म

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