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एजुकेट गर्ल्स बनी 2025 रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड पाने वाली पहली भारतीय संस्था

एशिया का सबसे बड़ा सम्मान, दो करोड़ से ज़्यादा बच्चियों को स्कूल लौटाने वाली सामुदायिक पहल को मिला अंतरराष्ट्रीय गौरव

31 अगस्त 2025
भारत की प्रमुख सामाजिक संस्था एजुकेट गर्ल्स को 2025 का रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया गया हैं। एशिया का यह सर्वोच्च सम्मान पहली बार किसी भारतीय संस्था को मिला है। यह पुरस्कार एजुकेट गर्ल्स को बालिकाओं और युवतियों की शिक्षा के समाज की अतार्किक सांस्कृतिक धारणाओं को चुनौती देने, उन्हें निरक्षरता से मुक्त करने और उन्हें कौशल, हिम्मत और आत्मनिर्भरता देने के लिए दिया गया है।
एजुकेट गर्ल्स संस्था अब उस गौरवशाली पंक्ति का हिस्सा बन चुकी है, जिसमें सत्यजीत रे, एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी, किरण बेदी, विनोबा भावे, दलाई लामा, मदर टेरेसा और ऑस्कर विजेता हायाओ मियाज़ाकी जैसी विश्वप्रसिद्ध विभूतियाँ शामिल हैं।
एजुकेट गर्ल्स की संस्थापक सफीना हुसैन ने कहा, “यह उपलब्धि हमारी टीम, बालिका स्वयंसेवकों, पार्टनर्स, समर्थकों और सबसे बढ़कर उन बच्चियों के नाम है, जिन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत, शिक्षा को फिर से हासिल किया। आने वाले दस वर्षों में एजुकेट गर्ल्स एक करोड़ से भी ज़्यादा शिक्षार्थियों तक पहुँचने का लक्ष्य रखता है। भारत के इस मॉडल को अब दुनिया के अन्य हिस्सों में भी साझा करने की योजना है, ताकि हर बच्ची को उसका शिक्षा के हक दे सके। हमें पूरा यकीन है कि जब एक लड़की पढ़ती है, तो उसका असर सिर्फ उसकी ज़िंदगी तक सीमित नहीं रहता, वह अपने साथ पूरे समाज को आगे बढ़ाती है।”
एजुकेट गर्ल्स की सीईओ गायत्री नायर लोबो ने कहा, “हमारे लिए शिक्षा सिर्फ़ विकास का साधन नहीं, बल्कि हर लड़की का बुनियादी अधिकार है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार, कॉरपोरेट, डोनर्स और समुदाय मिलकर काम करते हैं, तो गहरी सामाजिक और संरचनात्मक चुनौतियों को बदला जा सकता है। हम भारत सरकार के प्रयासों और सहयोग के लिए आभारी हैं, जिन्होंने इस मिशन को संभव बनाया। साथ ही, मालदीव की शाहिना अली और फिलीपींस के फादर फ्लावियानो विलनुएवा को भी हार्दिक बधाई, जिनके काम ने हम सभी को प्रेरित किया है।”
2007 में स्थापित एजुकेट गर्ल्स आज तक 30,000 से अधिक गाँवों में अपनी पहुँच बना चुकी है। 55,000 से ज्यादा सामुदायिक स्वयंसेवकों के सहयोग से संस्था ने 20 लाख से अधिक बशिक्षा से जोड़ने के लिए प्रेरित किया है और 24 लाख से ज्यादा बच्चों की पढ़ाई को बेहतर बनाया है।
आने वाले समय में एजुकेट गर्ल्स का लक्ष्य एक करोड़ से अधिक बच्चों तक पहुँचना है, ताकि शिक्षा के माध्यम से ग़रीबी और अशिक्षा के चक्र को तोड़ा जा सके।
रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड उन व्यक्तियों और संस्थाओं को दिया जाता है, जिन्होंने साहस और नवाचार के साथ समाज में गहरा बदलाव लाया हो। 2025 में यह सम्मान भारत की एजुकेट गर्ल्स, मालदीव की शाहिना अली और फिलीपींस के फादर फ्लावियानो एंटोनियो एल. विलनुएवा को मिला है। शाहिना अली को प्लास्टिक प्रदूषण और समुद्री तंत्र की रक्षा के प्रयासों के लिए, जबकि फादर विलनुएवा को मनीला के बेघर और ग़रीब लोगों की गरिमा बहाल करने के लिए सम्मानित किया गया है।
2025 के सभी विजेताओं को यह सम्मान 7 नवंबर 2025 को फिलीपींस की राजधानी मनीला के मेट्रोपॉलिटन थिएटर में आयोजित 67वीं रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड सेरेमनी में औपचारिक रूप से दिया जाएगा। इस मौके पर उन्हें मेडल और सर्टिफिकेट प्रदान किए जाएंगे। कार्यक्रम को फाउंडेशन के आधिकारिक फेसबुक और यूट्यूब चैनल पर लाइव देखा जा सकेगा।

अवॉर्ड के बारे में:
रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड एशिया का सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान माना जाता है। यह उन व्यक्तियों और संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने साहस और रचनात्मकता के साथ एशिया में मानवीय विकास के मुद्दों को सुलझाया हो और समाज को बेहतर बनाने में ठोस योगदान दिया हो।
एजुकेट गर्ल्स के बारे में:
एजुकेट गर्ल्स एक सामाजिक संस्था है जो राज्य सरकारों के साथ मिलकर ग्रामीण और शैक्षिक रूप से पिछड़े इलाकों में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देती है। इसका काम ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’, ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप है। 2007 से अब तक, संस्था ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के 30 हज़ार से अधिक गांवों में 20 लाख से ज़्यादा लड़कियों का स्कूल में दाखिला करवाने मे मदद की है। इसके साथ ही 55,000 से अधिक सामुदायिक वालंटियर्स का नेटवर्क भी खड़ा किया है।
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