औरंगाबाद की बेटी मोनिका श्रीवास्तव ने यूपीएससी में पूरे भारत में प्राप्त किया 16वां स्थान
आइएएस बन औरंगाबाद समेत पूरे राज्य को किया गौरवान्वित
औरंगाबाद। औरंगाबाद की बेटी मोनिका श्रीवास्तव ने यूपीएससी की परीक्षा में पूरे भारत में 16वां स्थान प्राप्त कर अपने परिवार , समाज और जिले का नाम गौरवान्वित किया है। मोनिका श्रीवास्तव औरंगाबाद जिला मुख्यालय के सत्येन्द्र नगर निवासी ई. बी. के. श्रीवास्तव एवं भारती श्रीवास्तव की बेटी है और नवबिहार टाइम्स अखबार के संपादक कमल किशोर एवं सोन वर्षा वाणी अखबार के संपादक श्रीराम अम्बष्ट की भगिनी है। ई. बी. के. श्रीवास्तव वर्तमान में जिला परिषद में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। मोनिका के नाना स्मृतिशेष लाला शम्भूनाथ और दादा स्मृतिशेष उमेशचंद्र श्रीवास्तव दोनों प्राचार्य और शिक्षाविद् थे। वहीं नानी स्मृतिशेष अरुणलता सिन्हा एवं दादी स्मृतिशेष श्याम कुमारी देवी समाजसेविका थीं।
मोनिका की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर और डीएवी पब्लिक स्कूल से हुई । वह पहले आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में बिहार टॉपर बनी। वर्ष 2022 में बीपीएससी में छठां स्थान लाकर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश, उसके बाद वर्ष 2024 में यूपीएससी परीक्षा में पहली बार में ही सफलता प्राप्त कर 455 रैंक लाई। वर्तमान में वह भारतीय रेलवे सेवा के अंतर्गत अंडर ट्रेनिंग अधिकारी के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। अब दूसरी बार यूपीएससी में शानदार प्रदर्शन करते हुए लंबी छलांग लगाकर ऑल इंडिया 16वां रैंक हासिल कर उन्होंने जिले ही नहीं, पूरे बिहार का नाम देशभर में रोशन कर दिया है।
पिता ई. बी. के. श्रीवास्तव ने बताया कि मेरी सबसे छोटी पुत्री मोनिका बचपन से ही असाधारण प्रतिभा की धनी रही हैं। पढ़ाई के प्रति उसकी लगन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में भी राज्य स्तर पर बेहतर स्थान प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2016 में आईआईटी गुवाहाटी से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद मोनिका ने कई प्रतिष्ठित ग्लोबल कंपनियों में काम किया, लेकिन उनके मन में समाज और देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना हमेशा जीवित रहा। इसी सपने ने उन्हें कॉपोरेट करियर छोड़कर प्रशासनिक सेवा की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
मोनिका अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार के समर्थन को देती है। वे कहती हैं कि उनके माता-पिता ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और शिक्षा के महत्व को समझाया। उनके पिता का सपना था कि उनकी बेटी एक अधिकारी बने और समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों के लिए काम करे। यही सपना उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गया।
मोनिका श्रीवास्तव की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से औरंगाबाद जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। जिले के बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। आज मोनिका की सफलता की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस रखते हैं।
