ख़बरबिहारराज्यस्वास्थ और लाइफ स्टाइल

स्वास्थ्य पर संकट: बिहार में बायो-मेडिकल कचरे का बढ़ता खतरा

बिहार में बायो-मेडिकल कचरे के बढ़ते बोझ और उसके उचित निस्तारण की कमी ने पूरे राज्य को संभावित महामारी के खतरे के मुहाने पर ला खड़ा किया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही अब सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति और बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, राज्य के 8 जिलों में लगभग 1 लाख अस्पताल बेड से उत्पन्न होने वाले बायो-मेडिकल अपशिष्ट के सुरक्षित प्रबंधन के लिए कम से कम 10 कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी की आवश्यकता है। लेकिन वर्तमान व्यवस्था इस आवश्यकता से काफी पीछे है।

भागलपुर, गया, मुजफ्फरपुर और पटना में संचालित मौजूदा ट्रीटमेंट प्लांट या तो अपनी संविदा अवधि पूरी कर चुके हैं या विस्तार पर काम कर रहे हैं। वहीं अस्पतालों, नर्सिंग होम्स और पैथोलॉजिकल लैब्स की बढ़ती संख्या के कारण कचरे की मात्रा कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में उपचार क्षमता और उत्पन्न कचरे के बीच का अंतर लगातार चौड़ा होता जा रहा है।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नए कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए कई बार टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन पारदर्शिता की कमी और पक्षपात के आरोपों के चलते ये प्रक्रियाएँ कानूनी विवादों में उलझ गईं।

परिणामस्वरूप, आज तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ सका।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही आने वाले समय में गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।

इस विषय पर ग्लैड फाउंडेशन की निदेशक श्रीमती संघमित्रा घोष ने कहा: “बायो-मेडिकल वेस्ट केवल कचरा नहीं, बल्कि संभावित संक्रमण का स्रोत है। अगर इसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया गया तो यह पूरे समाज के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। सरकार को तुरंत नए ट्रीटमेंट प्लांट्स की स्थापना, निजी भागीदारी को बढ़ावा और निगरानी व्यवस्था को सख्त करना चाहिए, वरना स्थिति बेकाबू हो सकती है।”

अब आवश्यक है कि बिहार सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे। मौजूदा सुविधाओं की क्षमता बढ़ाने, उनकी संविदा अवधि बढ़ाने और बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 के अनुरूप निजी उद्यमियों को नए प्लांट लगाने की अनुमति देने जैसे कदम प्राथमिकता के आधार पर उठाए जाएँ। तभी इस बढ़ते संकट को रोका जा सकता है और आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

Leave a Reply