संजीवनी बूटी मिशन’ के जरिए गोल्डन आवर में मरीजों तक पहुंचेगी मदद, हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार ने रखा H3 विजन
नई दिल्ली/नोएडा। सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के उद्देश्य से हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार ने एक महत्वाकांक्षी पहल की घोषणा की है। इस योजना के तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को मात्र एक रुपये की सेवा शुल्क व्यवस्था के माध्यम से हेलिकॉप्टर एयर एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। मिशन की शुरुआत वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे पर तीन हेलिकॉप्टर एंबुलेंस के साथ पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रस्तावित है।
संजीवनी बूटी मिशन’ नाम से शुरू होगी पहल
राघवेंद्र कुमार ने इस अभियान का नाम “संजीवनी बूटी मिशन” रखा है। उनका कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मौतें समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण होती हैं। यदि गोल्डन आवर के भीतर घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
एयर इंडिया अधिकारियों के साथ हुई बैठक
हाल ही में गुड़गांव स्थित एयर इंडिया टाटा के मुख्यालय में सड़क सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में एयर इंडिया के CEO कैम्पबेल विल्सन सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान राघवेंद्र कुमार ने अपने विजन को “H3 फॉर्मूला” के माध्यम से प्रस्तुत किया। H3 का अर्थ है— हेलिकॉप्टर, हाईवे और हॉस्पिटल।
उन्होंने हेलमेट पर तैयार किया गया मिशन का ब्लूप्रिंट भी अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित लोगों ने ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल बताया। एयर इंडिया के CEO ने हेलमेट मैन ऑफ इंडिया को सम्मानित भी किया।
टोल से ₹1 सेवा शुल्क का प्रस्ताव
योजना के अनुसार एक हेलिकॉप्टर का वार्षिक लीज खर्च लगभग 7 करोड़ रुपये बताया गया है, जिसमें फ्यूल और स्टाफ का खर्च शामिल है। तीन हेलिकॉप्टरों के संचालन पर करीब 21 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च आएगा।
राघवेंद्र कुमार का प्रस्ताव है कि एक्सप्रेसवे से गुजरने वाली प्रत्येक गाड़ी से केवल ₹1 सेवा शुल्क लिया जाए। इसके माध्यम से प्रति माह लगभग 3 करोड़ रुपये और सालाना करीब 36 करोड़ रुपये की राशि जुटाई जा सकती है। अतिरिक्त धनराशि से एक्सप्रेसवे और अस्पतालों के बीच कार एंबुलेंस नेटवर्क को भी मजबूत किया जा सकेगा।
अस्पतालों में हेलीपैड की तैयारी
दिल्ली-एनसीआर से सटे कई बड़े अस्पताल इस योजना को ध्यान में रखते हुए अपने परिसरों में हेलीपैड विकसित करने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ विदेशी कंपनियों ने भी इस परियोजना में सहयोग की इच्छा जताई है।
राघवेंद्र कुमार जल्द ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर इस मिशन पर विस्तृत चर्चा करेंगे। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना भी इस पहल में तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर सहयोग कर रही है।
सड़क हादसों में हर वर्ष जाती हैं लाखों जानें
भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार देश में हर वर्ष करीब दो लाख लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा देते हैं। सरकार का मानना है कि यदि घायलों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो कम से कम 60 हजार लोगों की जान प्रतिवर्ष बचाई जा सकती है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर भी बीते वर्षों में हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं, जिनमें सेना और पुलिस के जवान भी शामिल रहे हैं।
दोस्त की मौत के बाद शुरू किया अभियान
राघवेंद्र कुमार पिछले 12 वर्षों से सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2014 में नोएडा एक्सप्रेसवे पर उनके मित्र और रूम पार्टनर कृष्णा की हेलमेट नहीं पहनने के कारण सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इसी घटना के बाद उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं के खिलाफ जागरूकता अभियान शुरू किया।
अब तक वे देश के 22 राज्यों में जाकर 75 हजार से अधिक हेलमेट वितरित कर चुके हैं। उनका कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण और लोगों की जान बचाना ही उनके जीवन का उद्देश्य है।
राघवेंद्र कुमार का मानना है कि “भारत सड़क दुर्घटनाओं की समस्या से जूझ रहा है और इस पर विजय प्राप्त करने के बाद ही देश एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ सकेगा।”
