150 मास्टर कारीगरों के हुनर और हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी-सह-बिक्री, 10 सितंबर तक चलेगा आयोजन
पटना : वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार, भारतीय हस्तशिल्प एवं राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गांधी शिल्प बाजार (नेशनल) – 2026 प्रदर्शनी-सह-बिक्री का भव्य शुभारंभ गाँधी मैदान, गेट नंबर 5 के पास किया गया। इस बाजार का उद्घाटन मुख्य अतिथि बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव (आईएएस) शीर्षत कपिल अशोक, विशिष्ट अतिथि विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के सहायक निदेशक (हस्तशिल्प) भारत सरकार मुकेश कुमार, पूर्व अपर विकास आयुक्त (हथकरघा) सोहन कुमार झा, उप विकास अधिकारी, उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान, बिहार सरकार सत्यानंद शर्मा, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हेमा देवी, एचपीओ ऋषिन पाल, सामजसेवी अर्चना, एनसीएचएचडी के टेक्निकल एडवाइजर मनोज झा एवं प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर ललित बाबू द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। गांधी शिल्प बाजार में देश के विभिन्न राज्यों से आए 150 मास्टर कारीगर अपने हस्तशिल्प उत्पादों का प्रदर्शन और सीधे उपभोक्ताओं को बिक्री कर रहे हैं। इनमें 105 सामान्य वर्ग तथा 45 अनुसूचित जाति के कारीगर शामिल हैं। 1 से 10 सितंबर 2026 तक चलने वाले इस शिल्प बाजार में देश की अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक कला, शिल्प, वस्त्र, सजावटी सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं सहित अनेक आकर्षक उत्पाद लोगों के लिए उपलब्ध हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार सरकार के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि गांधी शिल्प बाजार हमारे कारीगरों की प्रतिभा और भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को आम लोगों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों की सीधे बिक्री को बढ़ावा देने से उनकी आय और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी। सहायक निदेशक (हस्तशिल्प) मुकेश कुमार ने कहा कि पटना में आयोजित यह बाजार बिहार वासियों के लिए देश के विभिन्न राज्यों की हस्तशिल्प परंपराओं को एक ही स्थान पर देखने और खरीदने का शानदार अवसर है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कारीगरों के उत्पाद खरीदकर लोकल फॉर लोकल और भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को मजबूत करें। बाजार में मधुबनी चित्रकला, ब्लॉक प्रिंट, ग्लास वर्क, कालीन एवं रूम्स, कढ़ाई, विभिन्न प्रकार की कढ़ाई, पारंपरिक वस्त्र, बांस एवं बेंत शिल्प, आभूषण सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों की विविध एवं आकर्षक हस्तशिल्प कलाओं से निर्मित उत्कृष्ट हस्तनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। आगंतुकों को देश के विभिन्न राज्यों से आए कारीगरों एवं बुनकरों द्वारा निर्मित विशिष्ट, पारंपरिक एवं कलात्मक उत्पादों को देखने तथा उन्हें सीधे कारीगरों से खरीदने का अवसर प्राप्त होगा। विशेष आकर्षण के रूप में पूर्वोत्तर भारत के 30 से अधिक हस्तशिल्प कारीगर एवं बुनकर भी इस आयोजन में भाग ले रहे हैं, जिनके द्वारा क्षेत्र की समृद्ध कला, शिल्प एवं हस्तकरघा परंपरा को प्रदर्शित किया जाएगा। आगंतुकों को पूर्वोत्तर राज्यों के विशिष्ट हस्तशिल्प एवं हस्तकरघा उत्पादों को देखने, उनकी कला एवं शिल्प परंपराओं से परिचित होने तथा सीधे कारीगरों से उत्पाद खरीदने का विशेष अवसर मिलेगा। एनसीएचएचडी के टेक्निकल एडवाइजर मनोज झा ने कहा कि गांधी शिल्प बाजार का उद्देश्य कारीगरों को प्रत्यक्ष विपणन का अवसर प्रदान करना, उनके उत्पादों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध कराना तथा उनकी आय एवं आजीविका के अवसरों को सुदृढ़ करना है। साथ ही, यह आयोजन देश की समृद्ध हस्तशिल्प एवं हस्तकरघा परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
