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बिहार-झारखंड में बढ़ी वजन प्रबंधन के इलाज की मांग, युरपीक की बिक्री में 20.8% मासिक बढ़ोतरी

बिहार और झारखंड, सितंबर 2026:  वजन बढ़ना आज सिर्फ महानगरों की चिंता नहीं रह गया है। छोटे शहरों और दूसरे राज्यों में भी लोग अब वजन और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। बिहार और झारखंड में भी लोग वजन को नियंत्रित करने और बेहतर स्वास्थ्य के लिए
डॉक्टर की सलाह से इलाज और दूसरे उपाय अपना रहे हैं। इसी बदलाव के बीच, सिप्ला के टिरज़ेपाटाइड ब्रांड युरपीक ने बिहार और झारखंड में महीने-दर-महीने 20.8% की बढ़ोतरी दर्ज की है। यह दर्शाता है कि इन राज्यों में वजन प्रबंधन से जुड़े इलाज की मांग बढ़ रही है।
डायबिटीज और ओबेसिटी केयर सेंटर के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. सुभाष कुमार ने कहा, : लोग अब सिर्फ जल्दी वजन कम करने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वे लंबे समय तक स्वस्थ रहने के बारे में भी सोच रहे हैं।
मरीज पोषण, एक्सरसाइज, वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ को लेकर ज्यादा सवाल पूछ रहे हैं। यह बढ़ती जागरूकता अच्छी बात है, क्योंकि लोग समय रहते अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना शुरू कर रहे हैं।”
मोटापा प्रबंधन के क्षेत्र में सेमाग्लूटाइड के कई ब्रांड आने के बाद इस बाजार में भी बढ़ोतरी हुई है। हालाँकि, कई डॉक्टरों और मरीजों के लिए टिरज़ेपाटाइड आधारित इलाज अभी भी एक पसंदीदा विकल्प बना हुआ है। इसकी वजह इसके इस्तेमाल को लेकर बढ़ता अनुभव और इससे जुड़े चिकित्सकीय फायदे हैं।
बिहार और झारखंड में युरपीक की बढ़ती माँग यह भी दर्शाती है कि महानगरों से बाहर भी लोग वजन प्रबंधन के लिए डॉक्टर की सलाह से इलाज को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं।

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