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सुरों की मिठास लिए लोकगीतों की कार्यशाला का हुआ शुभारंभ, बिहार कला केंद्र कर रही है आयोजन

लोकगीत गाँवों-कस्बों आदि का संगीत हैं। ये त्योहारों और विशेष अवसरों पर गाये जाते हैं। इसके लिए साधना की जरूरत नहीं होती है। उक्त बातें बिहार कला केंद्र द्वारा आयोजित सात दिवसीय “लोकगीत कार्यशाला” के उद्घाटन के अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने कही।

कार्यशाला का शुभारंभ उद्घाटनकर्ता समाज सेवी सुजय सौरभ और मुख्य अतिथि मधुप मणि “पिक्कू” ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यशाला का आयोजन अमर सर आर्ट, म्यूजिक एंड डांस स्कूल, कंकड़बाग, पटना में किया जा रहा है। यह कार्यशाला को बिहार सरकार से सम्मानित देश की मशहूर लोक गायिका रेखा झा के सानिध्य में संचालित हो रही है।

कलाकारों ने मनमोहक और बेहतरीन लोक गीतों से समा बांधा। कार्यशाला में कृपा, अपर्णा शरण, शैली कुमारी, विशिष्ट वेद, पल्लवी, पाटली एवं अन्य कलाकारों ने प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इसके पूर्व अतिथियों का स्वागत पार्षद पिंकी यादव एवं कुमार संजीत ने किया।

संस्था के सचिव अमर कुमार सिन्हा ने बताया की यह कार्यशाला 10 जून से लेकर 16 जून तक चलेगी। 10 जून को सभी प्रतिभागियों का रजिस्ट्रेशन किया गया। 11 जून से 16 जून तक लोकगीत की कार्यशाला होगी। आगामी 17 जून को फाइनल परफॉर्मेंस होगा।
बतौर अतिथि कलाकार दूरदर्शन के उमाकांत बरुआ, लोकनार्थक ओम कुमार, सहयोगी अमन राज एवं शहजादा ने भी अपनी कला से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।

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