सम्पादकीय

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स्कूल के बाहर खड़ी आधी आबादी : जब बेटियाँ बीच रास्ते लौट आती हैं

छूटी हुई पाठशाला, छिनते सपने : भारत की बेटियों की अधूरी शिक्षा; अधिकार से वास्तविकता तक : लड़कियों की स्कूली

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सम्पादकीय

भारतीय राजनीति में अपनी सादगी और साहस से इतिहास रचने वाले छोटे कद के बड़े राजनेता – डॉ अतुल मलिकराम 

भारतीय लोकतंत्र की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यहां नेतृत्व की ऊंचाई कभी सेंटीमीटर या फीट में नहीं नापी

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सम्पादकीय

लंबे कद और प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए प्रख्यात हुए भारतीय राजनीति के कद्दावर चेहरे – डॉ अतुल मलिकराम

भारतीय राजनीति में कद का तात्पर्य सिर्फ शारीरिक ऊंचाई से नहीं होता. राजनेताओं के विचार, फैसले, संघर्ष और जनता के

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जहाँ कभी हाथी बँधते थे, वहाँ अब स्मृतियाँ हैं, “रविवारीय” में आज पढ़िए- विरासत के क्षय की कहानी

🖋️ मनीश वर्मा ‘ मनु ‘ स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा आँखें खुली तो अपने आप को

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सम्पादकीय

जब साँसें सवाल पूछने लगें, “रविवारीय” में आज पढ़िए, प्रदूषण और हमारी चुप्पी

🖋️ मनीश वर्मा ‘ मनु ‘ स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा आज सुबह जैसे ही आँखें खुली,

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जब इलाज भी बाज़ार बन जाए: भारत में स्वास्थ्य अधिकार की लड़ाई

भारत में बढ़ती निजीकरण प्रवृत्ति और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय की कमी: क्या ‘स्वास्थ्य का अधिकार’ सच में न्यायालयों में लागू

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एकांत का सौंदर्य और भीतर की यात्रा: बदलते समय में आत्मिक अनुशासन की आवश्यकता

बाहरी दुनिया की चकाचौंध के बीच भीतरी संसार को सँभालना ही जीवन का सबसे बड़ा संतुलन आज का मनुष्य निरंतर

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विशाल दफ्तुआर ने गढ़ी मानवाधिकार की एक नई परिभाषा

मानवाधिकार पाने के लिये मानवीय व्यवहार जरूरी मानवाधिकार और मानव कर्तव्य एक दूसरे के पूरक भारत के मशहूर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार

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