सम्पादकीय

सम्पादकीय

“जब रिश्ते धारदार हो जाएँ, रविवारीय में आज पढ़िए- औरत, मर्द और समाज के बदलते समीकरण”

“औरत का चरित्र और मर्द का भाग्य…” – एक सामाजिक विमर्श “त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यम; देवो न जानाति कुतो मनुष्यः”

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सम्पादकीय

आयुष्मान भारत या असहाय भारत: निजी अस्पतालों में योजना की लूट और लाचारी

आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीबों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना है, परंतु निजी अस्पतालों द्वारा इसे लूट का

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