सम्पादकीय

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साहित्य और सत्ता की तस्वीरें: रसूख, दिखावा और लेखन की गरिमा

लेखक की सबसे बड़ी पूँजी उसके शब्द और उसकी स्वतंत्रता है, न कि सत्ता से नज़दीकी की तस्वीरें। प्रभावशाली व्यक्तियों

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सम्पादकीय

रक्षाबंधन- “रविवारीय” में आज पढ़िए, केवल धागा नहीं, रिश्तों की मिठास और अपनत्व का उत्सव

इस बार रक्षाबंधन का त्योहार शनिवार को पड़ा। हमारा दफ़्तर सप्ताह में पाँच दिन ही खुलता है, शनिवार और रविवार

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सम्पादकीय

स्कूल छोड़ती बेटियाँ: संसाधनों की कमी या सामाजिक चूक?

(“बेटियाँ क्यों छोड़ रही हैं स्कूल? सवाल सड़कों, शौचालयों और सोच का है” “39% लड़कियाँ स्कूल से बाहर: किसकी जिम्मेदारी?”

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