कॉलर ट्यून या कलेजे पर हथौड़ा: हर बार अमिताभ क्यों?
✍️ प्रियंका सौरभ सरकार को समझना चाहिए कि चेतावनी सिर्फ चेतना के लिए होती है, प्रताड़ना के लिए नहीं। एक
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Read Moreरूस-यूक्रेन युद्ध, चीन की आक्रामकता और उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों के बीच दुनिया एक नए परमाणु युग में प्रवेश
Read Moreआज कोचिंग संस्थानों को छात्रों की सफलता का सारा श्रेय मिलता है, जबकि वे शिक्षक गुमनाम रह जाते हैं जिन्होंने
Read More“जब व्यवस्था प्रेम को निगल गई: मंजू वर्मा की आत्मकथा पर एक दृष्टि” एक अधूरी कहानी का दस्तावेज: ‘राज सर
Read More“जब जीवन का अर्थ सिर्फ संपत्ति रह जाए” “अच्छे जीवन की भूलभुलैया: क्या खोया, क्या पाया?” आधुनिक समाज में “अच्छे
Read More“औरत का चरित्र और मर्द का भाग्य…” – एक सामाजिक विमर्श “त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यम; देवो न जानाति कुतो मनुष्यः”
Read Moreआयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीबों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना है, परंतु निजी अस्पतालों द्वारा इसे लूट का
Read More“टेकऑफ से पहले अंत: 242 ज़िंदगियाँ और एक सवालों से भरा आसमान” “ड्रीमलाइनर या डेथलाइनर?: जब उड़ान ही आख़िरी सफर
Read Moreरिश्ते अब महज़ ज़रूरतों के एटीएम बनते जा रहे हैं। डिजिटल दुनिया ने संवाद को ‘रीचार्ज पैकेज’ और मुलाक़ातों को
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