सम्पादकीय

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‘तृतीय परमाणु युग’: बदलती दुनिया और डगमगाते वैश्विक मानदंड

रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन की आक्रामकता और उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों के बीच दुनिया एक नए परमाणु युग में प्रवेश

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सम्पादकीय

कोचिंग का क्रेडिट, स्कूल की गुमनामी: शिक्षकों के साथ यह अन्याय कब तक?

आज कोचिंग संस्थानों को छात्रों की सफलता का सारा श्रेय मिलता है, जबकि वे शिक्षक गुमनाम रह जाते हैं जिन्होंने

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सम्पादकीय

“जब रिश्ते धारदार हो जाएँ, रविवारीय में आज पढ़िए- औरत, मर्द और समाज के बदलते समीकरण”

“औरत का चरित्र और मर्द का भाग्य…” – एक सामाजिक विमर्श “त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यम; देवो न जानाति कुतो मनुष्यः”

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सम्पादकीय

आयुष्मान भारत या असहाय भारत: निजी अस्पतालों में योजना की लूट और लाचारी

आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य गरीबों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना है, परंतु निजी अस्पतालों द्वारा इसे लूट का

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