“प्राइवेट स्कूल का मास्टर: सम्मान से दूर, सिस्टम का मज़दूर”
चॉक से चुभता शोषण: प्राइवेट स्कूल का मास्टर और उसकी गूंगी पीड़ा। “प्राइवेट स्कूल का मास्टर: सम्मान से दूर, सिस्टम
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Read Moreआजकल लोग निजी झगड़ों और रिश्तों की परेशानियों को सोशल मीडिया पर लाइव आकर सार्वजनिक करने लगे हैं, जहां आधी-अधूरी
Read Moreतेज़ होती गर्मी, घटते जलस्रोत और बढ़ती कंक्रीट संरचनाओं के कारण पक्षियों के लिए पानी और छांव जैसी बुनियादी ज़रूरतें
Read More“क्लासरूम से कॉर्पोरेट तक: उच्च शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी” “डिग्री से दक्षता तक: शिक्षा प्रणाली को उद्योग
Read Moreगांव की औरतें, जलवायु की मार: बीजिंग रिपोर्ट की चेतावनी “पानी, पेट और पहचान की लड़ाई: ग्रामीण महिलाओं पर जलवायु
Read Moreअख़बार के पन्नों की एक चौंकाने वाली सुर्ख़ी थी— “सीने में चीरा लगवाकर रखवाई गोली, बोली—मुझे मारा गया!” पहली बार
Read Moreभारत में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी अधिकार आज निजी संस्थानों के लिए मुनाफे का जरिया बन चुके हैं। प्राइवेट
Read Moreआस्था पेशाब तक पिला देती है, जाति पानी तक नहीं पीने देती। कैसे लोग अंधभक्ति में बाबा की पेशाब को
Read Moreएक नैतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की पुकार आज के भौतिकवादी और असहिष्णु समय में भगवान महावीर के विचार पहले से
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