सम्पादकीय

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राजनीतिक हस्तक्षेप से त्रस्त शिक्षा संस्थान

विश्वविद्यालय शैक्षणिक सुधारों के बजाय राजनीतिक हितों के पोषण का केंद्र न बनने पाएं। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति

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सम्पादकीय

जब पंकज उदास से नाराज हो गए थें राजेंद्र कुमार, पंकज उदास के जन्मदिन पर विशेष

“तुम्हारा भाई बदतमीज़ है। उसे ज़रा भी तमीज़ नहीं है। उसके अंदर कोई एटिकेट्स नहीं हैं।” ये बात राजेंद्र कुमार

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सम्पादकीय

बिना स्वतंत्र मीडिया के स्वस्थ लोकतंत्र को सुनिश्चित कर पाना संभव नहीं

राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते राजनेताओं और मीडिया घरानों के बीच सांठगांठ के परिणामस्वरूप अक्सर पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग होती है और असहमति

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