स्वामी विवेकानंद का ‘विश्वगुरु भारत’ : खंडित विश्व के लिए वेदांत की प्रासंगिकता
(जहाँ से विश्व को दिशा मिले : विवेकानंद और विश्वगुरु भारत की संकल्पना) डॉ. सत्यवान सौरभ इक्कीसवीं सदी का विश्व
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Read Moreडॉ. प्रियंका सौरभ अख़बार की एक छोटी-सी खबर कई बार पूरे समाज के चेहरे से नक़ाब हटा देती है। “पढ़ाई
Read Moreडॉ. सत्यवान सौरभ हाल ही में वेनेजुएला में घटित राजनीतिक घटनाक्रम और उसमें अमेरिकी हस्तक्षेप ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक
Read Moreभारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसके निरंतर नवीन बने रहने की क्षमता में है। हर चुनाव के साथ नई
Read Moreभारतीय राजनीति में चुनावी मुद्दे समय के साथ बदलते रहे हैं। कभी विकास, कभी महंगाई, कभी रोजगार तो कभी सुरक्षा
Read Moreमनीश वर्मा ‘ मनु ‘ स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा सभी को यह सौभाग्य कहाँ मिलता है
Read Moreडॉ सत्यवान सौरभ उच्च शिक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल छात्रों को डिग्री देना या उन्हें एक निश्चित साँचे में ढालना
Read Moreडॉ सत्यवान सौरभ नया वर्ष केवल कैलेंडर की तारीख बदलने का नाम नहीं है। यह हमारे जीवन में एक ठहराव
Read Moreडॉ. प्रियंका सौरभ नव वर्ष आते ही हमारे समाज में एक अजीब-सी हलचल शुरू हो जाती है। कैलेंडर बदलता है,
Read Moreभारतीय लोकतंत्र की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यहाँ नेतृत्व कभी शारीरिक क्षमता या रंग-रूप से नहीं नापा जाता,
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