सम्पादकीय

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तरक्की के दौर में खोती मुस्कान, “मनु की रविवारीय” में पढ़िए- वर्तमान में जीना ही खुशी की कुंजी

खुश रहने का नुस्ख़ा अहले सुबह जब आप सोकर उठते हैं , तो उसका अनुभव ही एक अलग अंदाज़ ए

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बाल श्रम की व्यथा और कठोर श्रम करते हाथ मूल सुविधाओं से वंचित।         

(1 मई ,अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष) अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस केवल

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एक देश, एक पाठ्यक्रम: संघीयता का संकट या शिक्षा क्रांति?

डॉ. सत्यवान सौरभ “रुकने वालों का इतिहास नहीं होता। एक देश–एक पाठ्यक्रम… शिक्षा के नाम पर लूट का विरोध जारी

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ज़िंदा रहते खुद की तेरहवीं, “मनु की रविवारीय” में पढ़िए- एक बुज़ुर्ग की पीड़ा ने समाज को दिखाया आईना

घर… जहाँ इंसान अपने आप को सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करता है। जहाँ से उसे पुरज़ोर सम्मान और भरोसे की

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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र में 4 आत्महत्याएँ

डॉ. सत्यवान सौरभ (आखिर क्यों टूट रहे हैं छात्र?) भारतीय तकनीकी शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थान, जिन्हें कभी “सपनों की फैक्ट्री”

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