सम्पादकीय

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जिंदगी का सच, “मनु की रविवारीय” में आज पढ़िए- परदे के पीछे रहकर भी पूरी व्यवस्था संभालते हैं ‘स्टेपनी’ जैसे लोग

स्टेपनी समय का पहिया भी अजीब है। इतनी तेजी से घूमता है कि उसकी गति का अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो

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संसद में महिला आरक्षण: संवैधानिक जरूरत या राजनीतिक रणनीति?

 डॉ. प्रियंका सौरभ संसद में महिला आरक्षण का प्रश्न भारतीय लोकतंत्र के विकास और उसकी समावेशी प्रकृति से गहराई से

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समाजवाद की बात, व्यवहार में भेदभाव, “मनु की रविवारीय” में पढ़िए- ‘हाउस हेल्प’ और ‘रेजिडेंट’ के बीच खड़ी अदृश्य दीवार

बराबरी ग्राउंड फ्लोर पर ही रह गई अपार्टमेंट में अमुमन दो लिफ्ट हुआ करता है । अगर अपार्टमेंट थोड़ा ज़्यादा

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भक्ति के दरबार में दो तस्वीरें, “मनु की रविवारीय” में आज पढ़िए श्रद्धा की आज़ादी और मुफ़्तख़ोरी की मजबूरी

🖋️ मनीश वर्मा ‘ मनु ‘ स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा सर्वदेव मंदिर के बहाने मेरे घ

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उज्ज्वला का उजाला या आपूर्ति का अंधेरा?

 डॉ. प्रियंका सौरभ हालिया एलपीजी संकट ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी महत्वाकांक्षी कल्याणकारी पहलों की चमक धूमिल कर दी है।

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सोशल मीडिया के शोर में दबती आम आवाज, “मनु कि रविवारीय” मे आज पढ़िए- वैश्विक मुद्दों पर आम आदमी की बेबसी

🖋️ मनीश वर्मा ‘ मनु ‘ स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा वैश्विक संकट और आम आदमी एक

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खोता हुआ क्वालिटी टाइम, “मनु की रविवारीय” में पढ़िए सोशल मीडिया के बीच सिमटती हमारी असली दुनिया

🖋️ मनीश वर्मा ‘ मनु ‘ स्वतंत्र टिप्पणीकार और विचारक अधिकारी, भारतीय राजस्व सेवा सोशल मीडिया और हम तब सोशल

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