ब्रांड का दीवाना है ये नया मध्यम वर्ग, रविवारीय में आज पढ़िए- ब्रांड वैल्यू
चलिए आज़ रविवारीय चिन्तन में हम अर्थ पर चिन्तन करते हैं। कुछ मनन करते हैं, कुछ जानने की कोशिश करते
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Read Moreआखिर क्यों सही से काम नहीं कर पा रही साहित्य अकादमियां? पिछले दशकों में पुरस्कारों की बंदर बांट कथित साहित्यकारों,
Read Moreमहिलाओं का वोट 48%, फिर सीटें 14% ही क्यों? भारत की महिला मतदाता; एक ताकत है जिसे गिना जाना चाहिए।
Read Moreविश्वविद्यालय शैक्षणिक सुधारों के बजाय राजनीतिक हितों के पोषण का केंद्र न बनने पाएं। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति
Read Moreआखिर क्यों बदल रहे हैं मनोभाव और टूट रहे परिवार? (भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन
Read Moreअभी दो-तीन दिन के अंतराल पर ही देश के दो बड़े शैक्षणिक बोर्ड का रिजल्ट आया है। 10वीं और 12वीं
Read More“तुम्हारा भाई बदतमीज़ है। उसे ज़रा भी तमीज़ नहीं है। उसके अंदर कोई एटिकेट्स नहीं हैं।” ये बात राजेंद्र कुमार
Read Moreसरकार की अपनी नीति पर भ्रम के कारण, गरीबों की नई अर्थव्यवस्था गंभीर खतरे में है। चूँकि भारत बेरोजगारी की
Read Moreपृथ्वी इकलौता ऐसा ग्रह है, जहाँ जीवन सम्भव है। जहाँ का वातावरण अनुकूल और प्रकृति सुगम और मनोरम है। मेरा
Read Moreराजनीतिक हस्तक्षेप के चलते राजनेताओं और मीडिया घरानों के बीच सांठगांठ के परिणामस्वरूप अक्सर पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग होती है और असहमति
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