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झूठे FIR से निर्दोषों का होता है मानवाधिकार हनन:विशाल दफ्तुआर

शीघ्र करेंगे राष्ट्रीय स्तर पर पहल

आईजी विकास वैभव को लिखा पत्र

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता और एचआरयूएफ चेयरमैन विशाल रंजन दफ्तुआर ने मगध प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव को पत्र लिखा है।अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि बिना मुकम्मल जांच के एफआईआर दर्ज न हो।जो लोग झूठे गवाहों के दम पर झूठी एफआईआर दर्ज करवाते हैं, उनके ऊपर कड़ी कार्रवाई हो।

एचआरयूएफ चेयरमैन ने लिखा है कि मौजूदा दौर कलयुग का नहीं बल्कि भटयुग है।मौजूदा दौर में दुष्टों की संख्या काफी बढ़ गई है। ऐसे लोग कानून का दुरूपयोग करके बेहिचक झूठी एफआईआर और कोर्ट केस करते हैं। अब तो बनाबटी बलात्कार पीड़िता के द्वारा बलात्कार के भी केस किये जाते हैं। ऐसे झूठे FIR से निर्दोष लोग बेवजह परेशान होते हैं और कई मर्तबा “लाल कोठी” का भी दर्शन कर लेते हैं। ऐसे कुत्सित प्रयासों के द्वारा निर्दोष लोगों की मान-प्रतिष्ठा को भी रौंदा जाता है। जिससे उनके मानवाधिकारों और मौलिक अधिकारों का भी हनन होता है।

जो समझदार और काबिल थाना इंचार्ज होते हैं,वो आरोप लगाने वाले गलत लोगों की मंशा को पहले ही भांप लेते हैं और तुरतफुरत एफआईआर दर्ज नहीं करते हैं। ऐसा करना भी उनका कानूनी दायित्व है।

दरअसल छह वर्षों के बाद मगध प्रक्षेत्र के आईजी के तौर पर योगदान देने के बाद विकास वैभव ने कल एफआईआर पर एक स्टेटमेंट दिया था।

विशाल दफ्तुआर ने कहा कि निकट भविष्य में वे माननीय सुप्रीम कोर्ट,भारत सरकार एवं राज्य सरकारों को पत्र लिखेंगे कि आरोप लगाने वालों के नार्को टेस्ट की भी त्वरित व्यवस्था हो ताकि लोगों के मानवाधिकारों का संरक्षण हो और झूठे आरोपों की जिल्लत के कारण वे असमय आत्महत्या न करें। झूठी एफआईआर और कोर्ट केस आज राष्ट्रीय स्तर पर एक भयावह कोढ़ बन गया है।

IG Vikas Vaibhav को Vishal Daftuar द्वारा भेजा गया पत्र

Official Letter

प्रतिष्ठा में, 

श्री विकास वैभव, 

पुलिस महानिरीक्षक, 

मगध प्रक्षेत्र,गया

विषय:

1)

बिना मुकम्मल जांच के FIR दर्ज न हो।

2)

झूठे गवाहों के दम पर जो लोग झूठी FIR दर्ज करवाते हैं,उन लोगों की बेहतरीन पुलिसिया खातिरदारी भी हो। 

3)

My upcoming initiatives at national level in public interest

निकट भविष्य में मैं माननीय सुप्रीम कोर्ट एवं भारत सरकार एवं राज्य सरकारों को पत्र लिखूँगा कि आरोप लगाने वालों का नार्को टेस्ट की भी त्वरित व्यवस्था हो ताकि लोगों के मानवाधिकारों का संरक्षण हो और झूठे आरोपों की जिल्लत के कारण वे असमय आत्महत्या न करें।

माननीय विकास वैभव जी, 

सादर नमस्कार और शुभकामनाएं!

अभी कलयुग नहीं,भटयुग चल रहा है!

आपके कल के एक स्टेटमेंट से अवगत हुआ जो FIR से संबंधित था।

मौजूदा दौर में दुष्टों की संख्या काफी बढ़ गई है।ऐसे लोग कानून का दुरूपयोग करके बेहिचक झूठी FIR और कोर्ट केस करते हैं।

अब तो बलात्कार का भी झूठा केस करके और बनावटी बलात्कार पीड़िता को भी उपलब्ध करवाने की साजिश हो रही है जो सचमुच किसी पुरुष के साथ संसर्ग की हुई होती है।अभी उत्तर प्रदेश में एक प्रतिष्ठित अखबार ने ऐसी एक खोजी पत्रकारिता की थी।

ऐसे में बिना किसी समुचित जांच के कोई भी FIR दर्ज नहीं होना चाहिए।

दरअसल दुष्टों के द्वारा झूठे आरोपों, झूठे साक्ष्यों और झूठे गवाहों के द्वारा ज्यादा से ज्यादा कड़ी धाराओं को चस्पाँ करके FIR दर्ज करवाया जाता है, जिससे निर्दोष लोग बेवजह परेशान होते हैं और कई मर्तबा “लाल कोठी” का दर्शन भी कर लेते हैं।ऐसे कुत्सित प्रयासों के द्वारा उनकी मान- प्रतिष्ठा को भी रौंदा जाता है और जिससे उनके मानवाधिकारों और मौलिक अधिकारों का भी हनन होता है।

जो समझदार और काबिल थाना इंचार्ज होते हैं,वो आरोप लगाने वाले गलत लोगों की मंशा को पहले ही भांप लेते हैं और तुरतफुरत FIR दर्ज नहीं करते हैं।ऐसा करना भी उनका कानूनी दायित्व है।

मेरे विचार से मौजूदा परिवेश में समुचित जांच के बाद ही कोई भी FIR दर्ज हो और जो दुष्ट झूठा FIR करते हैं झूठे गवाहों के दम पर, उन लोगों की बेहतरीन पुलिसिया खातिरदारी भी हो।

 

इस संदर्भ में निकट भविष्य में मैं माननीय सुप्रीम कोर्ट, भारत सरकार एवं राज्य सरकारों को पत्र लिखूँगा कि आरोप लगाने वालों का नार्को टेस्ट की भी त्वरित व्यवस्था हो ताकि लोगों के मानवाधिकारों का संरक्षण हो और झूठे आरोपों की जिल्लत के कारण वे असमय आत्महत्या न करें।

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