भरत तिवारी एनकाउंटर की न्यायिक जाँच स्वागतयोग्य:विशाल दफ्तुआर
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अगले सप्ताह कर सकता है पहल
भरत भूषण तिवारी सिस्टम की खामियों से आक्रोशित एक तेजतर्रार युवा था जिसने कई रचनात्मक कार्यों और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई थी। उसकी कार्यशैली में कई खामियां निकाली जा सकती है, लेकिन उसके इरादे नेक और समाज की भलाई हेतु थें।
आरा में पुलिस एनकाउंटर के द्वारा निहत्थे भरत भूषण तिवारी की हत्या कर देना दुनिया के अब तक के मानवाधिकार हनन की विभत्स घटनाओं में से एक है। इस घटना के लिये दोषी डीएसपी,शाहपुर एसएचओ समेत तमाम पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा होनी चाहिए।
मशहूर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं वैश्विक स्तर की संस्था ह्युमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन- एचआरयूएफ के फाउंडर चेयरमैन विशाल रंजन दफ्तुआर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को कल पत्र लिखा है।साथ ही इस संदर्भ में हायर लेवल पर त्वरित हस्तक्षेप के लिये टेलीफोनिक बातचीत भी की थी।
विशाल दफ्तुआर ने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के द्वारा भरत तिवारी के एनकाउंटर की पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से करवाने का आदेश स्वागतयोग्य है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अगले सप्ताह इस मामले में पहल कर सकता है लेकिन इसी बीच अगर न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी तब एनएचआरसी को पहल करने में संवैधानिक बाधा आ सकती है।
विशाल दफ्तुआर ने बताया कि भरत तिवारी के एनकाउंटर का विरोध कर रहे लोगों पर एफआईआर गलत है।एचआरयूएफ लीगल टीम इस मामले का अवलोकन कर रही है और जरूरत पड़ने पर एचआरयूएफ बड़ा पहल कर सकती है।
इस आलेख में व्यक्त विचार और विषय लेखक के निजी हैं।
