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बिहार में लाशों के ढेर पर चुनाव कराना चाहते हैं नीतीश कुमार – हिंदू समाज पार्टी

जनतंत्र में तानाशाह शासकों को जनता मिट्टी में मिला देती है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सिपहसालार केसी त्यागी ने बिहार में विधानसभा चुनाव हर हाल में कराने की बात कह कर बिहारियों के दरुण दशा का मजाक उड़ाया है।

केसी त्यागी ने कहा है कि अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव हो सकता है तो बिहार में विधानसभा का चुनाव क्यों नहीं हो सकता। यह पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना व तानाशाही बयान है। यह कहना है हिंदू समाज पार्टी बिहार प्रदेश के प्रभारी बाल्मीकि कुमार का। इस मुद्दे को लेकर आज बाल्मीकि कुमार ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि वे नीतीश कुमार से वे कुछ बुनियादी सवाल करना चाहते हैं कि जनता ने आपको बिहार को विकसित करने के लिए लगातार तीसरी बार जनादेश दिया। कोरोना काल में आप सभी मोर्चों पर फेल है। यह बताने की जरूरत नहीं लाखों लोग पैदल बिहार वापस लौटे हैं, भूख से मौतें हो रही हैं, सरकारी हॉस्पिटलों में जांच किट नहीं है, मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में चुनाव कराना बिहार की जनता के साथ खिलवाड़ करना है।

बाल्मीकि कुमार ने अमेरिका से बिहार की तुलना करने वाले लोगों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था और बिहार के स्वास्थ्य व्यवस्था में जमीन आसमान का फर्क है। बिहार में लाखों लोग प्रतिवर्ष समय पर दवा चिकित्सक और एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण अपनी जान गवा देते हैं। जिस महामारी का अभी तक इलाज नहीं ढूंढा गया है, जो महामारी घर घर में प्रवेश कर चुकी है।

अगर चुनावी माहौल बना तो लाशो की ढेर लग जाएगी और जो लोग बिहार में लाशों के ढेर पर चुनाव कराना चाहते हैं, उनकी असली मंशा क्या है या बिहार की जनता जान चुकी है। बाल्मीकि कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री से सवाल पूछा है कि चुनाव की इतनी हड़बड़ी क्यों बिहार के लोगों का जान बचाना और उनके लिए रोजी-रोटी की व्यवस्था करना जरूरी क्यों नहीं ? स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना जरूरी क्यों नहीं ? कानून व्यवस्था सड़क बिजली पानी स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा जैसी बुनियादी चीजों में सरकार को हरबड़ी क्यों नहीं ?

बाल्मीकि कुमार ने कहा कि बिहार को महामारी से बचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। बिहार के लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था हो लोग स्वस्थ रहेंगे खुशहाल रहेंगे तभी चुनाव हो सकता है। मरते लोगों को चुनाव में झोंकना अमानवीय और तानाशाही रवैया है।